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“कुछ पल शहीदों के नाम और उनके परिवारों के साथ”

हम सभी देश वासी इस वर्ष “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहे हैं। इस संदर्भ में पर्यटन क्षेत्र को एक विशेष दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है । पर्यटन के क्षेत्र को इस महोत्सव के साथ एक विशेष ढंग से जोड़कर देखना चाहिए । 

“आओ देखें अपना देश” इस अद्भुत प्रयास के अंतर्गत प्रत्येक पर्यटक को चाहिए की वह देश के अधिकतम गंतव्य स्थानों को समीप से देखें तथा विविधताओं से भरे हुए इस भारत देश की अनेकों एवं विभिन्न प्रकार की विरासतों एवं धरोहरों का व्यक्तिगत अनुभव करे । 

विविधताओं से भरे हमारे इस देश में थोड़े-थोड़े अंतर पर ही भिन्न भिन्न प्रकार की भाषाएं, संस्कृतियाँ, व्यंजन इत्यादि पर्यटकों को लुभाती है। जहां एक ओर हम इन पर्यटक स्थलों का प्रचार एवं प्रसार करते रहते हैं वहीं दूसरी ओर यह भी आवश्यक है की सभी पर्यटक अपने गंतव्य स्थानों के आसपास का भी विचरण एवं अनुभव करें । 

आमतौर पर हम किसी स्थान पर जाकर वहां की किसी विशिष्ट इमारत अथवा महल इत्यादि को देखने के पश्चात वहां के कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं पहनावों का लुत्फ उठाते हैं एवं वहां के व्यंजन इत्यादि का जायका लेते हैं। 

इसी संदर्भ में एक अतिरिक्त प्रयास यह भी होना चाहिए की किस प्रकार “आजादी का अमृत महोत्सव “ अपने को वास्तविक रूप से चरितार्थ करे एवं इस दिशा में भी सभी को प्रयत्न शील रहने की आवश्यकता है । 

इस आजादी को प्राप्त करने एवं संभाल के रखने में न जाने कितने वीरों ने अपने अपने प्राणों की आहुति दी है । प्रायः ये सभी वीर देश के कोने कोने से आते हैं तथा इनमे से अधिकांश बहुत ही छोटे गांवों या शहरों से आते हैं । 

पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी निजी एवं सरकारी संस्थानों को इन सभी गांवों एवं शहरों को रेखांकित करना चाहिए एवं उन सभी वीर बलिदानिओं के नाम एवं उनके निवास स्थानों को इंगित करना चाहिए । ऐसा करने से पर्यटक उन सभी शहीदों के गावों एवं शहरों के आसपास जाने पर उन परिवारों को मिलने एवं उनके साथ मिलकर कुछ समय बिता सकते हैं । जहां संभव हो पर्यटक उन परिवारों के साथ एक या दो रात तक रुक कर “गृह अतिथि” बनकर उनकी आय का माध्यम बन सकते हैं । 

ऐसे शहीदों के परिवार अधिकांशतः आर्थिक दृष्टि से कमजोर ही होते हैं एवं उनकी देख भाल करने के लिए आय के साधन अक्सर कम ही होते हैं । 

जहां एक ओर पर्यटक इन परिवाओं को मिलकर उनका होसला बड़ा सकते हैं तथा एक अपनापन व्यक्त कर सकते हैं की देशवासी ऐसे शहीदों के परिवारों को भूले नहीं हैं वहीं अपने अपने बच्चों को उन शहीदों के परिवारों से मिलवा कर उनकी गौरव गाथा का निजी अनुभव करा अपने देश के लिए अटूट प्रेम की भावना को मजबूत कर सकते हैं । 

प्रयास करने पर निसंदेह सफलता मिलेगी।